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Sunday, August 13, 2023

आया है यहां कौन ठहरने के वास्ते New -1

आया है यहां कौन ठहरने के वास्ते।

जीते ही जा रहे हैं मरने के वास्ते।


मोहलत जरा सी दे दे ये जिंदगी हमे

कुछ काम हैं बचे अभी करने के वास्ते।


सूरज की रोशनी तो निकलती है झूम के 

बस खुल के आसमां में बिखरने के वास्ते।


वादों पे कभी यूं ही एतबार ना करें

अक्सर तो ये होते हैं मुकरने के वास्ते।


मेहनत भी जरूरी है दुवाओं के अलावा

किस्मत की लकीरों को संवरने के वास्ते।

किस्मत की लकीरों को संवरने के वास्ते।

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