वो लोग जिनके हिस्से में गम नही आते।
अफसोस ऐसे लोगों में हम नही आते।
आंखों से भला अश्कों का हिसाब क्या करें।
ज्यादा ही चले आते है क्यों कम नहीं आते।
चलना ही पड़ता है हमे मंजिल की राह में
खुद अपने आप राह में कदम नही आते।
रिश्तों का बिगड़ना तो मुमकिन ही नही था
गर बेवजह ही दरमियाँ वहम नही आते।
वाइज़ से पूछता हूं मयकदे का रास्ता
जिस रास्ते में दैर-ओ-हरम नही आते।
जिस रास्ते में दैर-ओ-हरम नही आते।
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