वो तो मालिक ही जाने उसका उसूल क्या है।
सजा देता है पर बताता नही कि भूल क्या है।
सब नेकियां अपनी मै सूद मे लिखा दूं लेकिन
कर्जदार हूं उसका पता नही कि मूल क्या है।
बेवजह तो इस जहां मे उसने कुछ ना बनाया
इन्सान क्यों कहे जरूरी क्या फिजूल क्या है।
खुद के हिस्से के सभी कर्म निभाते जाओ
वो तो कहेगा नही कि उसको कुबूल क्या है।
मंजिल की दिल मे धुन हो और सोच हो सही
फिर राह मे कुछ भी मिले कांटे या फूल क्या है।

No comments:
Post a Comment