ENJOY READING, GO IN DREAMS


Saturday, June 19, 2021

शिकवा और शिकायत

                        

जो गुस्से मे कहा तुमने वो हंस के कहा होता।
तो आंसू मेरी आंखों से बेवजह न बहा होता।

क्या चीज बेरुखी है तुम भी तो जान पाते 
जो दर्द सहा मैने वो तूने भी सहा होता।

खत मेरे लिखे तुम तो यूं ही ना जला देते
इक बार उन्हे तुमने जो दिल से पढा होता।

हर बात भुलाकर तुम एक बार मिले होते
तो दरमियां हमारे शिकवा ना रहा होता।

उलझी हुई हमारी हर बात सुलझ जाती
कुछ तुमने कहा होता कुछ हमने कहा होता।

1 comment: