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Friday, June 24, 2022

अन्तर्मन

बिल्कुल सच है ये कथन।

मन से बड़ा है अन्तर्मन। 

दोनो का चरित्र अलग है।

मन है चंचल और चतुर।

कभी है सहमा कभी डरा।

कभी कभी आक्रोश भरा।

विचलित होता कभी कभी

कभी कभी स्थिर रहता।

कभी कभी उत्साहित सा।

और कभी बस बुझा हुआ।

पर वो जो अन्तर्मन है

मन के अन्दर जो मन है।

कुछ है नही छुपा उससे।

ना सहमा ना डरा हुआ।

सच्चाई से भरा हुआ।

जब कोई ना राह सुझाये।

अन्तर्मन तब राह दिखाये।

जीवन मे जब दुविधा आये

मन जब इधर-उधर बहकाये।

बस इतना ही जानिए

अन्तर्मन फिर जो कह दे

बस उसका ही मानिये।

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