कौन है जो निर्णय लेता है।
उसके मन से सब चलता है।।
सारे ग्रहों पर उसका वश है।
उसके आगे सब बेबस हैं।।
सारी सृष्टि है वही बनाता।
प्रलय विनाश वही है लाता।।
पंच तत्व से बनी ये काया।
सब कुछ है उसकी ही माया।।
जीव जन्तु पेड़ या पौधे।
सब मे ही वो जीवन भर दे।।
धूप छांव सब वो करता है।
नदिया सागर वो भरता है।।
देता वही वही सब हरता।
पाप पुण्य की गणना करता।।
किसके साथ कब क्या होना है।
कब जीना है कब मरना है।।
नही किसी को इसका ज्ञान।
दुनिया इन सबसे अंजान।।
पर जो है इन सब का ज्ञाता।
जो भी है सबका निर्माता।।
वह तो एक परम शक्ति है।
सबकी ही उसमे भक्ति है।।
दे ना सकूं मैं उसकी आख्या।
कैसे करूं मै उसकी व्याख्या।।
नही है मुझमे इतना ज्ञान।
वो है महान सर्व शक्तिमान।।
जैसा जिसके समझ मे आये।
नतमस्तक वैसा हो जाये।।

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