ENJOY READING, GO IN DREAMS
Sunday, October 3, 2010
मैं और तुम.
मैं और तुम.
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मैं मैं था, तुम तुम थे.
क्या कहे उस योग को.
सुखद संयोग को.
मैं और तुम हम हुए.
ख़त्म सारे गम हुए.
जाने पहचाने सफ़र पर.
अनजानी सी डगर पर.
मैं तेरे साथ चला.
तुम मेरे साथ चली.
भावनाओं की ज्वार थी.
मदमस्त बयार थी.
मन में एक डर सा था.
उत्तेजनाओं का बवंडर भी था.
लोग कहते रहे, लोग कहते रहे.
हम चलते रहे, हम चलते रहे.
हुआ वही जिसका हमे डर था.
समाज में एक जंग हुयी.
घरों की शांति भंग हुयी.
समाज के लिए हमे झुकना पड़ा.
साथ चलकर भी हमे रुकना पड़ा.
सारे रिश्ते ख़त्म हुए.
मैं मैं हुआ, तुम तुम हुए.
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i like yr kabita shayar sahab
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