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Monday, October 18, 2010

रह गयी बस याद बाकी




रह गयी बस याद बाकी
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रह गयी बस याद बाकी, अब न कुछ बाकी रहा.
मयकदा सब सो गया, जागा बस साकी रहा.

जब तुम्हारा साथ था, हम भी बहुत मशहूर थे.
और जब तुम न रहे, सब ख्वाब चकनाचूर थे.

मैंने सब कुछ कह दिया था,क्या तुम्हे कुछ याद है.
मैं यहाँ बर्बाद हूँ, और तू कहाँ आबाद है.

चार दिन की चांदनी थी,अब अँधेरी रात है.
लोग मुझसे पूछते हैं,क्या हुआ क्या बात है?

बोलो अब मैं क्या करूँ,क्या कहूँ,किससे कहूँ.
सहने की एक हद भी है,और मैं कितना सहूँ.

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