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Thursday, November 11, 2010

रूबाइयां



[ 1 ]

कोई आ जाता है अक्सर मेरे गुमनाम ख्यालों में।
उलझता जाता हूँ फिर मैं उसकी यादों के जालों में।
सौ बार कोशिश कर लिया आ न सका उससे बाहर
जाने क्या सुख मिलता मुझे इन जी के जंजालों में।

[ 2 ]

बंद आखों में बिन बोले चले आते हो तुम।
दिल को मेरे बस यूं ही बहला जाते हो तुम।
सोचता हूँ मैं कि ये कहीं सच तो नहीं है
ख्वाब है ये मुझे धीरे से समझा जाते हो तुम।

( 3 )

जीवन के किसी मोड़ पर गर तुम मिल जाना।
मुमकिन है इस हाल मे  होठों का सिल जाना।
सफ़र पर चलने का भी अपना सुख होता है
जरूरी नही है हर सफर मे मंजिल मिल जाना।

( 4 )

क्या हुआ जो मैं मिट गया तुझे बनाने में।
मेरी तो दुनिया उजड़ गयी तुझे महकाने में।
पर तुम न समझे मेरे प्यार की कीमत क्या है
यूँ तो सदियाँ गुजर गयी तुझे समझाने में।

( 5 )

कोई कितनी लगा दे ताकतें मुझको मिटाने में।
जिंदगी के इस जंग में मुझको हराने में।
मौत भी टकरा के लौट जाएगी मुझसे
गर खुदा ही लग गया कहीं मुझको बचाने में।

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