दुनिया के इस रंगमंच पर सिर्फ एक किरदार हैं हम।
डोर आत्मा की ऊपर है महज एक आकार हैं हम।
कोई भी साथ नही देगा कुछ ऐसी व्यवस्था है उसकी
उस सबसे बडी अदालत के खुद अपने पैरोकार हैं हम।
हम सबके जीवन नैया का असली नाविक एक ही है
बस उसकी दिशा बदलने को सिर्फ एक पतवार हैं हम।
ये बात तो बिल्कुल निश्चित है कर्मों से भाग्य बदलता है
हमने जैसे हैं कर्म किये वैसे फल के हकदार हैं हम।
हम से ही बनती है दुनिया हमसे ही बनता है समाज
इस रंग बदलती दुनिया के सब रंगों का आधार हैं हम।

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