ENJOY READING, GO IN DREAMS


Saturday, October 23, 2021

जीवन सागर पार

                        


जीवन सागर पार किनारा 

किसने देखा है।

पार समन्दर नाव हमारा 

किसने देखा है।


जीवन के इस पार तो इंसाँ 

खुद को समझ नही पाया

क्या होगा उस पार हमारा 

किसने देखा है।


मानव जन्म मिला है तो फिर 

मानव धर्म निभाना है

कौन जन्म फिर मिले दुबारा 

किसने देखा है।


जीवन पथ के दुविधाओं मे 

जब भी मन ये व्यथित हुआ

अन्तर्मन का दिया इशारा 

किसने देखा है।


वो गरीब जो महापुरुषों के 

प्रवचनो का नायक था 

कैसे कैसे किया गुजारा 

किसने देखा है।

No comments:

Post a Comment