हम कम्हार अपनी माटी के
चाहे जैसा रच लें खुद को
चाहे करें निर्माण हम अपना
या फिर करें विनाश स्वंय का।
ये जीवन संसार भरा है
कितनी ही विविधाओं से
पर उनमे से लेना क्या है
अच्छा हो चुनाव स्वंय का।
दिशा हमारी सही रही तो
सफल तो हम हो जायेंगे ही
जब तक लक्ष्य प्राप्त ना कर लें
हो न कभी विश्राम स्वयं का।
देश और मानव सेवा मे
हम ऐसा कोई काम करें
हम पर गर्व करे हर कोई
हो समाज मे नाम स्वयं का।

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