ईश्वर ने दिया है जन्म तुम्हे कुछ अच्छे कर्म करो।
हे मानव रूपी गिद्धों तुम कुछ तो शर्म करो।
एक दिन वो भी आयेगा तुम खुद ही पछताओगे
फिर सर पटकोगे अपना पर कुछ ना कर पाओगे
क्यों पत्थर दिल बन बैठे दिल कुछ तो नर्म करो।
हे मानव रूपी..........
स्वर्ग नर्क कुछ भी है नही ये सब है मन का फेरा
सब कुछ ईश्वर का ही है क्या तेरा और क्या मेरा
ईश्वर ने दिया है अवसर तो कुछ तो धर्म करो।
हे मानव रूपी .......
हम मानव हैं हमको तो मानवता दिखलाना होगा
पर-सेवा का पाठ हमे खुद को सिखलाना होगा
मानव सेवा मे आओ खुद को सरगर्म करो।
हे मानव रूपी ......

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