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Thursday, May 27, 2021

ये जीवन है

                  


 जैसा हम चाहेंगे सब कुछ वैसा तो नही होना है।

जीवन की परिभाषा मे कुछ पाना कुछ खोना है


जो बोवोगे वो काटोंगे जीवन की जब रीति यही

तो फिर हमको कर्म कृषि मे अच्छी फसलें बोना है।


छोड़ निराशा आशाओं की आओ हम सब बात करें

अच्छे वक्त भी आएँगे ही फिर किस बात का रोना है।


रंगमच की कठपुतली हैं डोर तो कोई और लिये है

उसकी धुन पर नाच रहे हम केवल एक खिलौना हैं।


सब कुछ छोड़ के जाना होगा ऐसा दिन भी आयेगा

कर्म हमारा चादर है और जीवन एक बिछौना है।

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