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Saturday, July 3, 2021

भूलना तुम्हे

                 


भूलता हूं तुम्हे फिर मैं तुम्हे ही याद करता हूं।

किसी तस्वीर मे जैसे कोई मैं  रंग भरता हूं।


साथ होते हो तुम मेरे तो अक्सर ये भी होता है

जाने कितनो की नजरों मे तो मैं यूं ही अखरता हूं।


तुम्हारा नाम लिखा ही दिखायी मुझको देता है

मैं अपने दिल की दीवारों से होकर जब गुजरता हूं।


तजुर्बें  सब मोहब्बत के मुझे इतना सुनाते हैं

कि अब इस राह पे तो मैं बहुत डर डर के चलता हूं।


जमाने भर की नजरों से मोहब्बत को बचाना है

तुम्हारा साथ ना छूटे कभी मैं यूं ही डरता हूं।

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