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Saturday, December 28, 2024

बादलों को खत लिखा। 51

बादलों को खत लिखा

क्यों छुपाते हो ग़मो को।।

दाग गहरे हो लिए तुम

खोल दो सारे भ्रमों को।

साथ ले इतने ग़मों को

कब तलक तुम यूं फिरोगे।

वो समय भी आयेगा ही 

अश्रु बनकर तुम गिरोगे।

मेरी आंखों में भी शायद 

काले बादल कुछ छुपे हैं।

जाने कितने प्रश्न हैं पर 

बुंदों में ही हल छुपे हैं।

बात बस इतनी लिखी

कि सारे बादल रो दिए।

आंसुओं का रूप ले

सारे गमों को धो दिए।

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