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Saturday, December 28, 2024

मन 50

मन ही जाने मन के भीतर चलता क्या है।

मन की दीवारों पर उठता गिरता क्या है।

मन की अपनी भाषा है

आशा और निराशा है।

सब प्रश्नों के उत्तर मन में

मन में ही जिज्ञासा है।

किस में है वो सफल और विफलता क्या है।

मन ही जाने मन के भीतर चलता क्या है।

कुछ ना उसकी थाह चले

मन अपनी प्रवाह चले।

कोई निश्चित दिशा नहीं

मन अनंत की राह चले।

खुद उसमें ही जलता और पिघलता क्या है।

मन ही जाने मन के भीतर चलता क्या है।

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