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Saturday, December 28, 2024

सवालात 49

खुद अपने ज़मीर से भी कभी बात कीजिए।

बस यूं ही कभी खुद से मुलाकात कीजिए।


अश्कों में छिपी बात समझता नही कोई

बेवजह ही आंखों से ना बरसात कीजिए।


जो वक्त गुजर जाएगा वापस ना आएगा

बेकार की बातों में ना दिन रात कीजिए।


मुमकिन तो है गैरों में कुछ खामियां मगर 

गर हो सके खुद से भी सवालात कीजिए।


कुछ बात हो गई है तो दिल से निकालिए

हर बात पर ऐसे ना फ़सादात कीजिए।


अब रूबरू बैठे हैं तो चुपचाप ना रहिए 

बेबात ही सही मगर कुछ बात कीजिए।

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