इतनी बातें हैं कि हर बात मैं कैसे लिख दूं।
है ज़मीं सूखी तो बरसात मैं कैसे लिख दूं।
ख्वाब आए नही और नींद भी नहीं आई
ऐसी रातों को भला रात मैं कैसे लिख दूं।
जाने क्यों आजकल वो क्यूं उदास रहता है
दिल के बिगड़े हुए हालात मैं कैसे लिख दूं।
कुछ तो बातें थीं जो होठों पे आ नही पाईं
अपने वो सारे ही जज़्बात मैं कैसे लिख दूं।
वो तो आंखों से बयां करते है शिकवे अपने
अपने दिल के भी सवालात मैं कैसे लिख दूं।
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