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Monday, May 20, 2024

एहतराम 26

यूं जिंदगी तमाम किए जा रहे हैं हम।

खुद से ही इंतकाम लिए जा रहे हैं हम।


पल भर की जिंदगी का कुछ भी पता नही

सदियों का इंतजाम किए जा रहे हैं हम।


हमने ही बनाए हुए हैं सब अपने मसअले 

सबको ही ये इल्जाम दिए जा रहे हैं हम।


वो एक नाम जुबां पर जो आ ही नही रहा

दिल में वही एक नाम लिए जा रहे हैं हम।


क्या सोचना कि कौन है कैसा मेरे लिए

सबका ही एहतराम किए जा रहा हैं हम।

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