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Saturday, November 5, 2022

अश्कों के तटबंध

 ऐसी कोई बात न हो।

आंखों से बरसात न हो।

सुख व दुख की गणना में

अश्कों में अनुपात न हो।

दिल के रिश्तों में अपने

कुछ हों ऐसे अनुबंध।

अश्क न बाहर आ पाएं

तोड़ के सब तटबंध।


हों सब ख्वाब सुनहरे।

रिश्ते भी हों गहरे।

दिल पे कभी न लग पाए

जज्बातों के पहरे।

अपने पावन रिश्तों में 

यही हो बस उपबंध।

अश्क न बाहर आ पाएं

तोड़ के सब तटबंध।

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