ऐसी कोई बात न हो।
आंखों से बरसात न हो।
सुख व दुख की गणना में
अश्कों में अनुपात न हो।
दिल के रिश्तों में अपने
कुछ हों ऐसे अनुबंध।
अश्क न बाहर आ पाएं
तोड़ के सब तटबंध।
हों सब ख्वाब सुनहरे।
रिश्ते भी हों गहरे।
दिल पे कभी न लग पाए
जज्बातों के पहरे।
अपने पावन रिश्तों में
यही हो बस उपबंध।
अश्क न बाहर आ पाएं
तोड़ के सब तटबंध।
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