तुम आओ तुम्हारा अभिनन्दन
तुम्हे एक समर्पित शाम करूं।
पुष्पों से भरे गुल्दस्ते से
एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।
हृदय के किसी अन्त: तल पर
यादों का एक पुलिंदा है।
कुछ तो उसमे मृतप्राय पड़े
पर कुछ तो अभी तक जिन्दा है।
निर्जीव पड़े स्मृतियों मे
तुम आओ तो उनमे प्राण भरूं।
पुष्पों से भरे गुल्दस्ते से
एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।
यादों का एक स्वभाव यही
बस अनायास आते रहना।
कोई चाहे या फिर ना चाहे
स्मृतियों मे छाते रहना।
आते जाते स्मृतियों का
तुम आओ तो अल्प-विराम करूं।
पुष्पों से भरे गुलदस्ते से
एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।

क्या बात है। बहुत उम्दा 👏👏👍👍
ReplyDeleteधन्यवाद
Deletevery nice
Deleteधन्यवाद
ReplyDeleteSIR BAHUT HI UMDA HAI
ReplyDeleteThank you
Deleteबहुत ही सुंदर प्रस्तुतीकरण एवं शब्दों का चयन 🙏🙏
ReplyDeleteThank you
Delete