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Thursday, October 14, 2021

एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।

 


तुम आओ तुम्हारा अभिनन्दन

तुम्हे एक समर्पित शाम करूं।

पुष्पों से भरे गुल्दस्ते से 

एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।


हृदय के किसी अन्त: तल पर

यादों का एक पुलिंदा है।

कुछ तो उसमे मृतप्राय पड़े 

पर कुछ तो अभी तक जिन्दा है।

निर्जीव पड़े  स्मृतियों  मे 

तुम आओ तो उनमे प्राण भरूं।

पुष्पों से भरे गुल्दस्ते से 

एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।


यादों का एक स्वभाव यही 

बस अनायास आते रहना।

कोई चाहे या फिर ना चाहे

स्मृतियों मे छाते रहना।

आते जाते स्मृतियों का 

तुम आओ तो अल्प-विराम करूं।

पुष्पों से भरे गुलदस्ते से

एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।

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