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Friday, June 7, 2024

फलसफे 35

 रहे ख्यालों में ख्वाबों में जो नहीं आए।

सवाल वो थे जवाबों में जो नहीं आए।


लिए हिसाब मैं बैठा हूं बीते लम्हों का

न जाने कैसे हिसाबों में जो नहीं आए।


जुर्म जिसने किए चेहरा छुपाए बैठे थे

फंस गए वो नकाबों में जो नहीं आए।


खुद अपनी बेबसी पर कुढ़ते ही रहे 

वो कांटे गुलाबों में जो नहीं आए।


कुछ ऐसे भी फलसफे हैं दुनियादारी के

रहे जुबां पे किताबों में जो नहीं आए।

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