हैं लोग यहां कुछ ऐसे
जिनकी ये फनकारी है।
है चाक-ए-गिरेबाँ लेकिन
नीयत में अय्यारी है।
कुछ फिक्र नहीं है उनको
क्या सच्चा है क्या झूठा।
मतलब हो जिससे अपना
उसकी ही तरफदारी है।
अब उनसे क्या है कहना
उनको है क्या समझाना।
बस स्वार्थ सिद्ध करने का
मिल जाए जिन्हें बहाना।
वैसे तो है खुदगर्जी
वो कहते हकदारी है।
कोई क्या बतलाए उनको
ये कैसी समझदारी है।
है चाक-ए-गिरेबाँ लेकिन
नीयत में अय्यारी है।
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