ENJOY READING, GO IN DREAMS


Tuesday, August 23, 2022

हौसला

               


( बिहार की एक बालिका जो किसी दुर्घटना मे अपना एक पांव गंवा चुकी है लेकिन शिक्षा के प्रति , पढ़ाई के प्रति , ज्ञान के प्रति अपने हौसले को नही गंवाया। एक पैर पर ही कूद कूद कर अपने घर से एक किलोमीटर दूर स्थित अपने स्कूल रोज जाती है। ये कविता उसी बालिका और उसके हौसले को समर्पित है। ) 

है नही एक पांव तो भी क्या हुआ।

दूर अपना गांव तो भी  क्या हुआ।।

ज्ञात है मुझको मेरी जीवन दिशा।

है सुदृढ अपनी बहुत जिजीविषा।।

मूल्य शिक्षा का मुझे मालूम है।

मेरी इच्छा का मुझे मालूम है।।

है ललक स्कूल जाने की मुझे।

खुद मे कुछ कर दिखाने की मुझे।।

ये मेरा स्कूल घर से दूर है।

चाह शिक्षा की मगर भरपूर है।।

एक ही पांव पर कूद कूद कर।

जाती हूं स्कूल खुशी से झूम कर।।

क्या हुआ जो मैं बहुत विपन्न हूं।

उत्साह से उल्लास से संपन्न हूं।

अपने वश मे जो है मैं तो कर रही।

पर समय से भी मैं थोड़ा डर रही।।

लक्ष्य मेरा क्या मुझे मिल पायेगा।

फूल शिक्षा का मेरा खिल पायेगा।।

जो भी हो पर अब रुकुंगी मैं नही।

परिस्थितियों के आगे झुकूंगी मैं नही।।

दिन मेरा भी एक दिन तो आयेगा।

नाम मेरा दुनिया पर छा जायेगा।।

नाम मेरा दुनिया पर छा जायेगा।।

No comments:

Post a Comment