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Tuesday, August 23, 2022

प्रतिस्पर्धा

 एक प्रतिस्पर्धा रहती है 

ख्वाबों व अश्कों के मध्य

छिड़ ही जाता है एक द्वंद

अक्सर ही मेरी आंखों मे।

कभी हारते अश्क सभी

जीत ही जाते ख्वाब मेरे।

कभी हारते ख्वाब सभी

जीत ही जाते अश्क मेरे।

अपनी भी एक विवशता है

एक अपनापन दोनो से है।

असमय अनचाहे रार मे

दोनो के ही तकरार मे

मेरी भूमिका बस इतनी 

एक मूक समर्थन दोनो को 

कोई हारे कोई जीते।

दोनो ही हैं स्वीकार मुझे।

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