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Tuesday, August 23, 2022

क्यों तुम इतने दूर हुये

 इतने क्यों मजबूर हुये।

अपनो से ही दूर हुये।

कुछ ही दिन तो बीते हैं 

तुमको यूं मशहूर हुये।


जज्बात मे तर्क नही होते।

हर बात के अर्थ नही होते।

निर्भर सब विश्वास पे है

रिश्तों मे शर्त नही होते।

लेकिन जो तुमने रखे हैं

सब शर्त मे हमे मंजूर हुये।

क्यों तुम इतने दूर हुये।


शिकवा और शिकायत हो।

ये भी एक रवायत हो।

दिल पर कोई बोझ नही

यह भी एक हिदायत हो।

कुछ खट्टी मीठी बातें ही 

क्या रिश्तों मे नासूर हुये

क्यों तुम इतने दूर हुये।

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