देखिए ये दिन भी ढलता जा रहा है।
बस यूं ही सब कुछ बदलता जा रहा है।
कुछ भरोसा है नहीं अब वक्त का भी
वक्त हाथों से निकलता जा रहा है।
रास्ते पर चल रहा हर आदमी
रास्तों में ही उलझता जा रहा है।
जिंदगी की चाह में हर शय यहां
थोड़ा थोड़ा रोज़ मरता जा रहा है।
तोहमतें अपनों ने इतने हैं लगाए
दिल पे अब बोझ बढ़ता जा रहा है।
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