ज़िंदगी तुमको निखरना होगा।
बस थोड़ा और बिखरना होगा।
सामने वो हैं आ गए शायद
अब तुम्हे आह भी भरना होगा।
झील में चांद उतर आया है
उसे भी आज संवरना होगा।
एक नज़र यूं ही देखने के लिए
उसकी राहों से गुजरना होगा।
दिल उसे भूल रहा है अब तो
फिर से ज़ख्मों को उभरना होगा।
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