रास्ता सही है लेकिन घुमाव ज्यादा है।
खतरा कम है लेकिन बचाव ज्यादा है।
इस जिंदगी का है इतना ही फलसफा
सफर है बहुत छोटा पड़ाव ज्यादा है।
फैसले में देरी का सबब यही है शायद
मुंसिफ का मुल्जिम में झुकाव ज्यादा है।
हर आम आदमी का दिन कट रहा ऐसे
खुशियां हैं बहुत थोड़ी तनाव ज्यादा है।
मुंह फेर के बैठे है अपनो में ही कुछ लोग
बस कहने को ही हमसे लगाव ज्यादा है।
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