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Tuesday, January 2, 2024

निरुत्तर तुम। 13

तुम्हे सोचकर दिल मेरा 

सब कुछ कह जाता है।

सब कह कर भी शायद 

कुछ रह भी जाता है।

तुमसे उत्तर की अभिलाषा

सदा संजोए रहता है।

मन ही मन में ख्वाबों के

बीज वो बोए रहता है।

दिल मेरा जो कहता है

नि:शब्द नहीं होते।

मगर तुम्हारे उत्तर में

कुछ शब्द नही होते।


            उत्तर का पन्ना

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दुनिया की हर बात अलग

दुनिया की रीति निराली है।

प्रश्नों का पन्ना भरा हुआ

उत्तर का पन्ना खाली है।

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