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Friday, September 2, 2022

झांकती खुशियां

 कभी 

समय निकालकर 

दिल की अलमारी मे

अच्छे से सजाउंगा।

करीने से लगाऊंगा।

उदास खड़ी हुई

आड़ी तिरछी

बेतरतीब सी

बिखरी पड़ी 

उदासियों को।

मायूसियों को।

और बनाऊंगा 

सुन्दर सा रास्ता 

उत्सुकता से झांकती

मुस्कराती हुई

खिलखिलाती हुई

खुशियों के लिये।

सज ही जायेगी

दिल की अलमारी

जिसमे रहेंगी 

न्यूनतम उदासियां

अधिकतम खुशियां।

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