उच्च वर्ग व निम्न वर्ग
समाज के दो स्तम्भ।
दोनो के ही बीच खड़ी
ऊंची-नीची पथरीली
एक सामाजिक दीवार।
उसी दीवार पर खड़ा ,
उत्सुक और सशंकित
आकांक्षाओं से भरा
कल्पनाओं से डरा
कभी इधर झांकता
कभी उधर झांकता ,
अंतर्द्वंद्व से जूझ रहा
सबका अध्ययन करता
मध्यम से माध्यम बनता,
एक और सामाजिक वर्ग ।
चिर-परिचित मध्यम वर्ग।

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