मैने शायद आज है कोई सपना देखा।
जो थे अब तक गैर उन्हे भी अपना देखा।
समय एक सा रहता नही किसी का भी
उसका भी है बनना और बिगड़ना देखा।
गम को भी रहता है इन्तजार खुशी का
गमों का भी है सजना और संवरना देखा।
सारी दुनिया खुशबू से भरने की जिद मे
बेमौसम ही फूलों का महकना देखा।।
बनी रहे हिम्मत मंजिल को पा लेने की
कुछ लोगों का गिरना और संभलना देखा।
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