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Sunday, April 24, 2011

छोड़ के जाना न तुम मुझे


मेरे लिए तो तेरी एक मुस्कान बहुत है
इतना तो करम कर दे एहसान बहुत है।

या खुदा तू उससे मुझे एक बार मिला दे
सुना है उससे तेरी पहचान बहुत है।

सहता हूँ किस तरह तुझे मालूम नहीं है
मेरे दुश्मन की तरफ तेरा रुझान बहुत है।

खिचता ही जा रहा हूँ बस तेरी तरफ मैं
वैसे तो मोहब्बत के सिवा काम बहुत है।

दिल की सुनूँ मैं या ज़माने की सुनूँ मैं
मेरा दिल मोहब्बत में बदनाम बहुत है।

अब आ गए हो छोड़ के जाना न तुम मुझे
पहलू में तेरी मुझको आराम बहुत है।

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