क्या होगा मोहब्बत का असर जानता हूँ मै।
दिल पर ही बरसेगा कहर जानता हूँ मैं।
यादों मे मेरी हर पल दिन रात तुम्ही हो
पर तुझको नहीं है खबर जानता हूँ मैं।
दिल की तसल्ली के लिए बैठा हूँ किनारे
न आएगी मोहब्बत की लहर जानता हूँ मैं।
कितने ही दफा तुमसे मिलने की दुआ की
ना भूलूंगा मैं वो शामो-सहर जानता हूँ मैं।
नाकाम हसरतों को लिए जी रहा हूं मैं
इक दिन तो पीना है जहर जानता हूँ मैं।

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