मुश्किलें तो आयेंगी ही उनसे घबराना कैसा.
मंजिलें मिल जाएँगी थक कर रुक जाना कैसा।
प्यासा कोई आए और प्यासा चला जाए
जाम से जाम न टकराए तो मैखाना कैसा।
जान देना ठीक है गर हो वफ़ा उस प्यार में
वर्ना यूँ ही बेवजह प्यार मे मर जाना कैसा।
हो खता किसी और की फिर तो कोई बात है
गर खता अपनी हो तो औरों पे झुंझलाना कैसा।
जी नहीं सकता हूँ तुम बिन ये पता तुमको भी है
फिर तेरा यूँ रूठकर मुझसे चले जाना कैसा।
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