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Sunday, September 5, 2010

Ek chahat-Ek tammana-कहाँ हो तुम.

 













कहाँ हो तुम.

मैंने तुमको याद किया है,

ईश्वर से फ़रियाद किया है,

मेरा पूरा विश्व तुम्ही हो,

जीवन का परिदृश्य तुम्ही हो,

मेरा तो संकल्प तुम्ही हो,

जीवन का विकल्प तुम्ही हो,

तुम बिन मैं तो जी न सकूँगा,

खुद के आंसू पी न सकूँगा,

एक बार तुम ध्यान से देखो,

मेरा अपने प्रति प्यार तो देखो,

क्या मुझसे कोई आस नहीं है,

मुझ पर क्या विश्वास नहीं है,

एक बार तो आ जाओ तुम,

मुझसे मिलकर ही जाओ तुम,

अपनी तुमसे क्या कहूं मैं,

तुम ही कहो कितना सहूँ मैं,

मैं खुद से ही जूझ रहा हूँ,

आखिर तुमसे पूछ रहा हूँ,

यदि तुमको आना ही नहीं था,

मुझको यदि पाना ही नहीं था,

स्मृति में मेरे छायी क्यों तुम,

मेरे जीवन में आई क्यों तुम.

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