ENJOY READING, GO IN DREAMS
एक सहारा मौन का
अपनों के इस जहाँ में
मैं जब भी हुआ अकेला,
तुमने मुझे पुकारा.
जीवन के इस संघर्ष में,
मैं जब भी हुआ निराश,
तुम बन गए सहारा.
जब तिनका भी न मिला ,
मेरे इस डूबते भाग्य को,
तुमने दिया किनारा.
तुम्ही हो मेरे अपने,
कहने को क्या कहें,
कि सारा जहाँ हमारा.
पर एक प्रश्न है,
तुम कौन हो?
तुम मौन हो.
तुम मौन हो.
i like it
ReplyDeleteThanks
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